प्रनवउँ पवनकुमार खल बन पावक ग्यानघन । जासु हृदय आगार बसहिं राम सर चाप धर ॥ . . याचना नहीं, अब रण होगा, जीवन-जय या कि मरण होगा। - 1 Followers, 0 Following, 103 Feeds